महाराष्ट्र राज्यपाल भाजपा के पूर्व CM कोश्यारी की होने वाली है छुट्टी! शिवाजी पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद

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Maharashtra governor Bhagat Singh Koshiyari on his way out?

Maharashtra governor Bhagat Singh Koshiyari on his way out?
Maharashtra governor Bhagat Singh Koshiyari on his way out?

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की छुट्टी होने वाली है? केंद्र उनके रवैये से बेहद नाराज है, क्योंकि शिवाजी महाराज पर उनकी टिप्पणी के बाद फडणविस-शिंदे सरकार में दरार पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इस बीच महा विकास अघाड़ी ने कल बंद का आह्वान किया है।

Maharashtra governor Bhagat Singh Koshiyari on his way out?

महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार को लगता है कि महाराष्ट्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद पर बने रहने में अब शायद कोई रुचि नहीं रही, और इसी कारण वह लगातार संवेदनशली मुद्दों पर विवादित बयान देते रहे हैं। उनके बयान ऐसे हैं कि उन्हें बरखास्त कर उनके गृह राज्य उत्तराखंड भेज देना चाहिए।

हाल ही में राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र गौरव और योद्धा छत्रपत शिवाजी महाराज पर क गई टिप्पणी के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए अजित पवार ने कहा था, “जब में वित्त मंत्री के रूप में उनसे मुलाकात करने गया था तो उन्होंने खुद ही मुझसे कहा था वे अब थक गए हैं और वापस जाना चाहते हैं। लगता है उनके विवादित बयान इसी क्रम का हिस्सा हैं ताकि केंद्र इसका संज्ञान ले और उन्हें वापस भेज दे।”

शिवाजी महाराज पर कोश्यारी की टिप्पणी के विरोध में महाराष्ट्र में कल बंद का आह्वान किया गया है। साथ ही इस सप्ताह राज्यपाल के खिलाफ एक मोर्चा भी निकालने की योजना है। इसी बीच राज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है वे शिवाजी महाराज और अन्य गौरवशाली महापुरुषों का सम्मान करते हैं और वे भविष्य में कभी भी ऐसी टिप्पणियां नहीं करेंगे। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि उनके बयान को तोड़मरोड़कर पेश किया गया है।

लेकिन यह तथ्य है कि कोशियारी को अपनी जुबान पर काबू नहीं है, भले ही उनकी टिप्पणी से राज्य सरकार को दिक्कत ही क्यों हो। याद रखना चाहिए कि वे ही सरकार के मुखिया हैं। महा विकास अघाड़ीसरकार के दौरान भी उन्होंने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले और उनके सुधारवादी पति महात्मा ज्योतिबा फुले, के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। इन दोनों को ही महाराष्ट्र का गौरव और आदर्श माना जाता है।

याद दिलादें कि उन्होंने एक और बयान में महाराष्ट्र वासियों का अपमान किया था जब उन्होंने कहा था कि गुजराती मारवाड़ियों को बिना मुंबई कुछ भी नहीं। जब इस बयान पर बवाल हुआ तो उन्होंने माफी मांग ली थी। और अब जबकि महाराष्ट्र में उनकी ही पार्टी की अगुवाई वाली सरकार है उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की है, जो कि गडकरी तक को अच्छी नहीं लगी। इस टिप्पणी से बीजेपी के साथ सरकार में शामिल बालासाहबंची शिवसेना तक ने चेतावनी दी कि अगर राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो यह सरकार और गठबंधन दोनों को खतरे में पड़ जाएंगे।

बात इतनी बिगड़ गई है कि छत्रपति शिवाजी के दो प्रत्यक्ष वंशज और सातारा सीट से नेता उदयनराजे भोसले ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने और कोशियारी को वापस बुलाने की मांग की है। इसके अलावा कोल्हापुर सीट के संभाजीराजे भोसले ने भी महाराष्ट्र बंद की चेतावनी दी है।

इस बीच महा विकास अघाड़ी ने कल यानी मंगलवार 13 दिसंबर को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। इस आह्वान को ट्रेडर समुदाय का भी समर्थन हासिल है।

गौरतलब है कि महा विकास अघाड़ी के शासन के दौरान भी राज्यपाल विवादित बयान देते रहते थे लेकिन चूंकि उनके बयान तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को परेशान करने वाले होते थे, इसलिए केंद्र चुप रहता था। लेकिन अब चूंकि महाराष्ट्र में बीजेपी और शिंदे गुट वाली शिवसेना की साझा सरका है, ऐसे में केंद्र को भी चिंता सताने लगी है। यही कारण है कि पिछले सप्ताह राज्यपाल को दिल्ली तलब किया गया था और इस मुद्दे पर सफाई मांगी गई थी।

अब मामला काफी आगे बढ़ चुका है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि उनका माफीनामा सामने आने और उदयनराजे की पीएम से मिलने की बात होने के बात सूत्रों को लगता है कोश्यारी की वह इच्छा जल्द ही पूरी होने वाली है जो उन्होंने अजित पवार के सामने जताई थी। यानी उनकी जल्द ही छुट्टी होने वाली है। वैसे इस सिलसिले में कई विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को भी पत्र भेजे हैं। और सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ने केंद्रीय गृहमंत्री से इस बाबत स्पष्टीकरण मांगा है।

वैसे भी अब यह आम धारणा है कि ऐसा व्यक्ति जो महाराष्ट्र के गौरवशाली आदर्शों के प्रति विवादित टिप्पणियां करता रहा हो उसे किसी भी हालत में पद पर बने रहने का हक नहीं है। और अगर ऐसा नहीं हुआ तो इससे मौजूदा गठबंधन सरकार में दरार पड़ सकती है। तो मान लिया जाए कि महाराष्ट्र राज्यपाल के दिन अब गिने-चुने ही बचे हैं।

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