
असम में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के अधिकतर जलमग्न इलाकों से पानी का स्तर कम होने के बावजूद लगभग 1.3 लाख लोग अब भी इस आपदा से प्रभावित हैं।
Assam flood toll rises to 87 with 2 more deaths, nearly 1.3 lakh still affected
असम में बाढ़ के कारण दो और लोगों की मौत होने के साथ ही, इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के अधिकतर जलमग्न इलाकों से पानी का स्तर कम होने के बावजूद लगभग 1.3 लाख लोग अब भी इस आपदा से प्रभावित हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में गरज के साथ अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान जताया है, जिससे इन दोनों राज्यों की सीमा से लगे असम के कई जिले प्रभावित हो सकते हैं। इतिहास
मौसम कार्यालय ने कहा, ‘‘मौसम के मिजाज से संकेत मिलता है कि मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स, पश्चिमी जैंतिया हिल्स और पूर्वी जैंतिया हिल्स तथा अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे, कुरुंग कुमेय, पूर्व कामेंग, पूर्व सियांग, लोहित और चांगलांग जिलों में अधिकतर स्थानों पर गरज-चमक के साथ अत्यधिक भारी बारिश (ऑरेंज और रेड अलर्ट) का अनुमान है। इसका असर असम के पड़ोसी जिलों पर पड़ सकता है।’’
मौसम विभाग ने नगालैंड के अधिकतर हिस्सों के लिए येलो अलर्ट भी जारी किया है, जिससे असम के चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले प्रभावित हो सकते हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) द्वारा सोमवार रात जारी बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटे में शिवसागर जिले से दो लोगों की मौत की सूचना मिली है। इन मौतों के साथ ही इस वर्ष बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या 87 तक पहुंच गई है।
एएसडीएमए के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हालांकि बाढ़ प्रभावित असम के अधिकतर ऊपरी जिलों से रातभर बारिश होने की सूचना है, लेकिन जलमग्न गांवों में पानी का स्तर घट रहा है जिससे ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है।’’ छह जिलों में कुल मिलाकर 1,28,000 लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। शिवसागर में सबसे अधिक 55,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हैं।
वहीं, चराईदेव में लगभग 35,000 और जोरहाट में 20,000 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।एएसडीएमए बुलेटिन में कहा गया है कि विभिन्न हिस्सों से तटबंधों, घरों, सड़कों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों सहित विभिन्न बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचने की भी सूचना है।
बुलेटिन में यह भी बताया गया कि वर्तमान में नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।



