अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशियों से भरी नाव डूबी, 250 लापता

sagar parvez

Boat carrying 250, including Rohingya refugees and Bangladeshis, sinks in Andaman Sea

Boat carrying 250, including Rohingya refugees and Bangladeshis, sinks in Andaman Sea
Boat carrying 250, including Rohingya refugees and Bangladeshis, sinks in Andaman Sea

रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में लगभग 250 लोग लापता बताए जा रहे हैं

Boat carrying 250, including Rohingya refugees and Bangladeshis, sinks in Andaman Sea

अंडमान सागर से एक हृदयविदारक समाचार सामने आया है, जहां रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में लगभग 250 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि केवल 9 लोगों को ही बचाया जा सका है।

यह नाव बांग्लादेश के टेक्नाफ से अवैध रूप से मलेशिया की ओर जा रही थी।

संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) के अनुसार, क्षमता से अधिक भीड़ और खराब मौसम इस हादसे का मुख्य कारण बने। यह घटना समुद्र के रास्ते होने वाले अवैध प्रवासन के खतरों और शरणार्थियों की मजबूरी को एक बार फिर उजागर करती है।

हादसे का मुख्य कारण और बचाव कार्य

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह हादसा अंडमान सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ। बताया जा रहा है कि नाव में लगभग 280 लोग सवार थे, जो इसकी क्षमता से कहीं अधिक थे। तेज हवाओं और समुद्र की लहरों के दबाव के कारण नाव अपना संतुलन खो बैठी और पलट गई। बांग्लादेशी कोस्ट गार्ड ने जानकारी दी कि ‘MT मेघना प्राइड’ नामक जहाज ने समय रहते 9 लोगों को समुद्र से सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन बाकी लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पीड़ितों की आपबीती और मानव तस्करी

हादसे में जीवित बचे रफीकुल इस्लाम ने मानव तस्करी के काले खेल का पर्दाफाश किया है। उन्होंने बताया कि कई लोगों को अच्छी नौकरी का झांसा देकर टेक्नाफ में बंधक बना लिया गया था। बाद में उन्हें जबरन मछली पकड़ने वाली एक पुरानी नाव पर चढ़ा दिया गया। नाव की स्थिति इतनी खराब थी कि महिलाओं और बच्चों तक को छोटे से स्टोर रूम में ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। यह गवाही दर्शाती है कि कैसे तस्कर मासूम लोगों की जान जोखिम में डालते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय अपील

इस बड़ी त्रासदी के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए मानवीय सहायता और फंडिंग बढ़ाई जाए। यूएन का मानना है कि बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के अभाव में ही ये लोग बेहतर भविष्य की तलाश में समुद्री लुटेरों और तस्करों के जाल में फंसकर ऐसे खतरनाक सफर पर निकलने को मजबूर होते हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवासन की चुनौती

अंडमान सागर लंबे समय से अवैध प्रवासन का एक खतरनाक रूट बना हुआ है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में शरण लेने की चाहत में हर साल हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर क्षेत्रीय सरकारों के सामने मानव तस्करी रोकने और समुद्री सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने की चुनौती पेश कर दी है। लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन समय बीतने के साथ किसी के जीवित बचने की उम्मीदें बेहद कम होती जा रही हैं।

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