
उन्नाव में भारी बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया और करीब सात फीट गहरा गड्ढा बन गया।
7ft pit opens up on Ganga Expressway now, Sheet and shawl cover it, rather than repair, India
हजारों करोड़ रुपये की लागत से तैयार जिस एक्सप्रेसवे को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास का मॉडल बताया गया, उसकी असल स्थिति पहली बारिश से ही सामने आ गई। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच मानसून की बारिश ने एक बार फिर मोदी सरकार के ‘विकास’ को बहा ले गई!
दरअसल, उन्नाव में भारी बारिश के बाद गंगा एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया और वहां करीब सात फीट गहरा गड्ढा बन गया। यह वही एक्सप्रेसवे है, जिसे सरकार उत्तर प्रदेश के विकास की नई रफ्तार और अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है।
कई फीट गहरा गड्ढा बन गया
बसीरतगंज टोल प्लाजा के पास प्रयागराज की ओर जाने वाले कैरिजवे पर करीब 423.6 किलोमीटर पर सड़क के धंसने से करीब पांच फीट चौड़ा और सात फीट गहरा गड्ढा बन गया। हादसे की आशंका को देखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से से करीब 300 मीटर पहले ही बैरिकेडिंग कर यातायात को दूसरी लेन में डायवर्ट कर दिया गया।
आपको बता दें, गंगा एक्सप्रेसवे कोई सामान्य सड़क परियोजना नहीं है। करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर लगभग 36,230 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को हरदोई में इसका उद्घाटन किया था। केंद्र सरकार ने इसे उत्तर प्रदेश के विकास और कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना बताया था।
उद्घाटन के समय जिस एक्सप्रेसवे को विकास की नई ‘लाइफलाइन’ बताया गया था, अब उसी पर मानसून के दौरान सड़क धंसने की घटनाएं सवाल खड़े कर रही हैं।
दूसरी बार हुआ ऐसा
खास बात यह है कि इस मानसून में उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे पर सड़क क्षतिग्रस्त होने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 17 अगस्त को दही थाना क्षेत्र के सोनिक गांव के पास करीब 421 किलोमीटर पर सड़क के किनारे की मिट्टी बह गई थी। करीब 200 मीटर हिस्से में सड़क को नुकसान पहुंचा था।
गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के समय सरकार ने इसे यूपी की कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति देने वाली परियोजना बताया था। लेकिन अब मानसून की बारिश के बाद सड़क के धंसने की तस्वीरें उसी विकास मॉडल पर सवाल खड़े कर रही हैं।



