
UAE के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिस ड्रोन ने इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहर निशाना बनाया, वह उन तीन ड्रोन में से एक था जो “पश्चिमी सीमा की दिशा से देश में दाखिल हुए थे.”
Drone strike causes fire outside nuclear power plant in UAE; no impact on radiation safety levels
मिडिल ईस्ट में जंग का खतरा कहीं से भी कम नहीं हुआ है. बात न्यूक्लियर तबाही तक आ सकती है और यह जोखिम फिर से सामने आया है. यूएई के अबू धाबी अमीरात में रविवार को एक परमाणु बिजली संयंत्र (न्यूक्लियर पावर प्लांट) के पास ड्रोन हमले के बाद आग लग गई. अच्छी बात है कि अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और रेडिएशन स्तर पर भी कोई असर नहीं पड़ा. यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जिस ड्रोन ने इस जगह को निशाना बनाया, वह उन तीन ड्रोन में से एक था जो “पश्चिमी सीमा की दिशा से देश में दाखिल हुए थे.”
यूएई में क्या हुआ?
यह हमला अल धफरा इलाके में स्थित “बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट” की अंदरूनी सुरक्षा सीमा के बाहर लगे एक बिजली जनरेटर पर हुआ. मंत्रालय ने कहा, “हमलों का स्रोत पता लगाने के लिए जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.”
यूएई के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगाश ने इस हमले की निंदा करते हुए इशारों में ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगी समूहों का जिक्र किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, “बराकाह स्वच्छ परमाणु ऊर्जा संयंत्र को आतंकवादी तरीके से निशाना बनाना, चाहे यह मुख्य हमलावर ने किया हो या उसके किसी सहयोगी ने, बेहद खतरनाक स्थिति पैदा करता है.” उन्होंने इस घटना को “एक काला दृश्य बताया जो सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों का उल्लंघन करता है.” उन्होंने हमलावरों पर यूएई के आम नागरिकों की जिंदगी की परवाह न करने का आरोप लगाया.
बता दें कि ईरान समर्थित ड्रोन से लैस हथियारबंद समूह इराक में मौजूद हैं. वहीं यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के पास भी लड़ाई में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन हैं. यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि देश “इस बिना उकसावे वाले आतंकी हमले की सबसे कड़ी निंदा करता है” और “किसी भी हालत में अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालने की अनुमति नहीं देगा.”
इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के बारे में जानें
बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट ने साल 2020 में काम शुरू किया था. यह यूएई की राजधानी अबू धाबी से करीब 200 किलोमीटर पश्चिम में सऊदी अरब और कतर की सीमा के पास स्थित है. सरकारी कंपनी “एमिरेट्स न्यूक्लियर एनर्जी कंपनी” ने 2024 में कहा था कि यह संयंत्र देश की लगभग एक-चौथाई बिजली जरूरत पूरी करता है.
फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने पुष्टि की कि आग से बिजली संयंत्र की सुरक्षा या जरूरी सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
बराकाह प्लांट का संचालन करने वाली “कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन” (KEPCO) के एक अधिकारी ने कहा कि कोई हताहत नहीं हुआ और प्लांट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार अधिकारी ने कहा, “ऐसा नहीं लगता कि हमारे द्वारा संचालित परमाणु संयंत्र पर सीधा हमला हुआ। लगता है बाहरी इलाके में मौजूद दूसरी बिजली सुविधाओं में आग लगी.”
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी इस हमले की निंदा की. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ग्रॉसी ने “घटना पर गंभीर चिंता जताई” और कहा कि “परमाणु सुरक्षा को खतरे में डालने वाली सैन्य गतिविधियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं.”




