Swiggy-Zomato से नहीं आएगा खाना, Ola-Uber भी ठप, तेल की बढ़ी कीमतों के खिलाफ गिग वर्कर्स का प्रदर्शन

sagar parvez

India | Gig workers stage 5-hour strike over fuel price hike

India | Gig workers stage 5-hour strike over fuel price hike
India | Gig workers stage 5-hour strike over fuel price hike

यूनियन का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर पड़ेगा, जिनकी रोजी-रोटी मोटरसाइकिल और स्कूटर पर निर्भर है।

India | Gig workers stage 5-hour strike over fuel price hike

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने ऑनलाइन डिलीवरी और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। करीब चार साल बाद ईंधन के दामों में हुई इस बड़ी वृद्धि के विरोध में गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। यूनियन की मांग है कि कंपनियां तुरंत प्रति किलोमीटर सर्विस रेट बढ़ाएं।

यूनियन ने क्या कहा?

यूनियन का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर पड़ेगा, जिनकी रोजी-रोटी मोटरसाइकिल और स्कूटर पर निर्भर है। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन महंगा हुआ है।

सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, एलपीजी संकट ने भी गिग वर्कर्स की परेशानियां बढ़ा दी हैं। गैस की कमी के चलते कई रेस्तरां और क्लाउड किचन ने अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं या अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसका असर फूड डिलीवरी कारोबार पर भी पड़ा है और ऑर्डरों में 50 से 70 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन डिलीवरी कर्मचारियों की आय प्रभावित हो रही है, जिनकी कमाई अधिक ऑर्डर मिलने पर मिलने वाले प्रोत्साहन पर निर्भर करती है।

कर्मचारी अब बढ़ते खर्च को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि महंगाई और भीषण गर्मी के बीच ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी श्रमिकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। उनके अनुसार, स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और अन्य कंपनियों से जुड़े डिलीवरी कर्मचारी अब बढ़ते खर्च को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। यूनियन ने सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों से मांग की है कि वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए।

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन और वाहन रखरखाव के बढ़ते खर्च के मुकाबले आय में सुधार नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र को छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर महिला गिग वर्कर्स, डिलीवरी एजेंटों और ड्राइवरों पर पड़ रहा है, जो कठिन मौसम और भारी ट्रैफिक के बीच रोजाना 10 से 14 घंटे तक काम करते हैं।

आपको बता दें, कल यानी रविवार को होने वाले पांच घंटे के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, ओला, उबर और रैपिडो जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

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