निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का हरिद्वार में फंदे पर लटका मिला शव, कुछ दिन से हरिद्वार में चाय बेचने का काम कर रहा था, पुलिस जांच में जुटी

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Urrarakhand | Surendra Koli, acquitted in Nithari serial killing case, found dead in Haridwar, India

Urrarakhand | Surendra Koli, acquitted in Nithari serial killing case, found dead in Haridwar, India
Urrarakhand | Surendra Koli, acquitted in Nithari serial killing case, found dead in Haridwar, India

वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था। उसका शव दुकान के अंदर रस्सी के सहारे फंदे पर लटका मिला।

Urrarakhand | Surendra Koli, acquitted in Nithari serial killing case, found dead in Haridwar, India

देशभर में चर्चित निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था। उसका शव दुकान के अंदर रस्सी के सहारे फंदे पर लटका मिला।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली के स्वजन को भी घटना की जानकारी दे दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।

चाय की दुकान में फंदे पर लटका मिला शव

शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली थी कि सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित चाय की दुकान में एक व्यक्ति ने फांसी लगा ली है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मृतक की पहचान ग्राम मंगरुखाल, भिकियासैंण, अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई।

कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था

शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि सुरेंद्र कोली निठारी कांड में आरोपित रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और किराए पर चाय का खोखा लेकर उसे चला रहा था। पुलिस के अनुसार, दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में किया था बरी

बता दें कि वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड में दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। वर्ष 2006 में निठारी हत्याकांड और दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद वर्ष 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उसे उम्रकैद में बदल दिया था।

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