उत्तराखंड में लाशों पर राजनीति, राजधानी देहरादून में कब्रिस्तान विवाद, नहीं दफ़नाने दिया जनाज़ा

sagar parvez

Politics over Corpses in Uttarakhand: Cemetery Dispute in the Capital, Dehradun; Funeral Procession Barred from Burial

Politics over Corpses in Uttarakhand: Cemetery Dispute in the Capital, Dehradun; Funeral Procession Barred from Burial
Politics over Corpses in Uttarakhand: Cemetery Dispute in the Capital, Dehradun; Funeral Procession Barred from Burial

देहरादून में मुर्दों को दफनाने के लिए मारामारी और तकरार सामने आई है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने आरोप लगाया कि कब्रिस्तानों के नाम पर राजनीती हो रही है।

Politics over Corpses in Uttarakhand: Cemetery Dispute in the Capital, Dehradun; Funeral Procession Barred from Burial

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मोरोवाला एवं सुभाषनगर के कब्रिस्तानों में मुर्दों को दफनाने को लेकर तकरार हो गई है। यहां पर बाहर से आकर रहे लोगों के परिवारों में मौत के बाद मुर्दों को दफनाने से मना कर दिया गया है।

टर्नर रोड, आजाद कॉलोनी के कई इलाकों के लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यह मामला वक्फ बोर्ड, जिला प्रशासन से लेकर पुलिस तक पहुंचा है। कब्रिस्तान कमेटियां जगह कम होने से दिक्कत और हरिद्वार बाईपास पर कब्रिस्तान उपलब्ध होने की बात कह रही है।

दरअसल, 13 अप्रैल को टर्नर रोड पर अकबर हुसैन का इंतकाल हो गया, सुभाषनगर में उन्हें दफनाने को मना कर दिया गया। उनके बेटे हातिम ने इस पर नाराजगी जताई कि वह टिहरी से आकर 1998 से यहां रह रहे हैं। मना करना गलत है। बाद में शव को चंदरनगर कब्रिस्तान में दफनाया गया। इसी तरह के मामले मोरोवाला में सामने आए हैं।

कब्रिस्तान कमेटियों पर ये आरोप लगाए गए

टर्नर रोड निवासी आसिफ बेग, सादिक, अब्दुल समद, अंसार उल हक आदि का कहना है कि मोरोवाला कब्रिस्तान की जगह किसी के नाम नहीं है। बाहरी बताकर मुर्दे दफनाने से मना किया जा रहा है। जबकि यह कब्रिस्तान सबके लिए दिया गया था। टिहरी, पौड़ी, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर से वर्षों पहले आकर रहने वाले परिवार परेशान है। सुभाषनगर में भी भराव करने की बात कहकर मना किया जा रहा है।

यह बोली मोरोवाला की कमेटी

मोरोवाला कब्रिस्तान कमेटी के सदर आबिद अली का कहना है कि अंग्रेजों के दौर से यह कब्रिस्तान गांव के लिए दिया गया है। पहले आबादी बहुत कम थी, अब कई गुना आबादी हो गई है। गांव के लिए ही तीन तीन बार कब्र खोदने पर जगह मिलती है। ऐसे में बाहर के लोगों के लिए कैसे संभव होगा?

कब्रिस्तानों के नाम पर हो रही राजनीति:शम्स

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि कब्रिस्तान हर किसी का है, किसी मुर्दे को दफनाने से मना नहीं कर सकते। सुभाषनगर में कमेटी अध्यक्ष हाजी नौशाद, सचिव जाकिर हुसैन से वार्ता की है। कब्रिस्तान कब्रों से भर गया हैं। इसीलिए कमेटी उसमें भराव करा रहा है। कब्रिस्तानों के नाम पर कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं।

कबाड़ी पुल कब्रिस्तान के लिए बनाई कमेटी

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि कबाड़ी पुल के पिछली तरफ करीब 16 बीघा का कब्रिस्तान तत्कालीन मेयर विनोद चमोली ने आवंटित कराया था। उसे प्रयोग करने की अपील सभी से की गई है। एक माह पूर्व बैठक करके एक कमेटी भी बनाई गई थी, शिकायत करने वाले लोगों को भी कमेटी में रखा है।

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