
धौलीगंगा विद्युत परियोजना की सामान्य और आपातकालीन सुरंगों को जाने वाला रास्ता अवरुद्ध हो गया, जिससे राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (एनएचपीसी) के 19 श्रमिक बिजलीघर के अंदर फंस गए। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
19 NHPC employees trapped as both tunnels of Dhauliganga project blocked
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास ऐलागाड़ क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन तबाही जारी है। धौलीगंगा विद्युत परियोजना की सामान्य और आपातकालीन सुरंगों को जाने वाला रास्ता अवरुद्ध हो गया, जिससे राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (एनएचपीसी) के 19 श्रमिक बिजलीघर के अंदर फंस गए। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
धारचूला के उप जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि मलबा हटाने के लिए मशीनें तैनात कर दी गई हैं और शाम तक रास्ता साफ कर लिया जाएगा, जिसके बाद सभी मजदूर बाहर आ सकेंगे।
उन्होंने बताया कि ऊपर से लगातार मलबा गिरने के बावजूद सीमा सड़क संगठन और हालवेज कंपनी की जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य जारी है। वर्मा ने कहा कि सभी श्रमिक सुरक्षित हैं और बिजलीघर का रास्ता खुलने के बाद वे बाहर निकल आएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि विद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन सामान्य रूप से जारी है।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से रविवार को उत्तराखंड के अधिकांश जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही, अगले पांच दिनों का अनुमानित मौसम के बारे में भी सुझाव दिए हैं। इसी के चलते सम्बन्धित जिला अधिकारियों ने अपने, अपने जनपदों में भी राहत और सुरक्षा दलों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हर समय तत्पर रहने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग ने आज और सोमवार दोनों दिनों के लिए राज्य के देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंहनगर जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह स्थिति आगामी चार अगस्त तक रहने की आशंका व्यक्त की गई है।
उत्तराखंड में बादल फटने, बाढ़ आने और भूस्खलन से तबाही
गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश से बादल फटने, बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से मची तबाही मची हुई है। शुक्रवार को एक दंपति समेत छह लोगों की मौत हो गयी। जबकि 11 अन्य लापता हो गए।
अधिकारियों ने बताया थआ कि चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर जिलों में प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक कहर बरपा, जहां कई मकान और मवेशी मलबे में दब गए, कृषि भूमि बर्बाद हो गयी, अनेक वाहन बह गए और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए थे।




