
दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग (रेस कोर्स रोड) पर स्थित करीब 125 से 150 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को अधिकारियों द्वारा 6 दिन में खाली करने का नोटिस और बिजली-पानी काटा
Now, 250 yr old Race Course Mosque in Delhi faces demolition, India
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक ‘रेस कोर्स मस्जिद’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस मस्जिद को छह दिनों के अंदर खाली करने का नोटिस दिया गया है. रेस कोर्स मस्जिद प्रधानमंत्री आवास के पास लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है. यह ऐतिहासिक मस्जिद करीब 125 से 130 साल पुरानी है, जो दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति में दर्ज है. रेस कोर्स मस्जिद साल 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और इसे धरोहर स्थल के रूप में भी सूचीबद्ध किया गया है. इसके बावजूद इसे खाली करने का आदेश दिया गया है. मस्जिद के नाम नोटिस दिए जाने के बाद कई सियासी नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक डेलिगेशन ने किरेन रिजिजू से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा है. इसमें मस्जिद और सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित कब्रिस्तान को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है.
ओवैसी ने अल्पसंख्यक मंत्री से की दखल की अपील…
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद के मामले में दखल देने का आग्रह किया. ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस मामले में रिजिजू के तत्काल दखल की जरूरत है.
AIMIM चीफ ओवैसी ने कहा, “वक्फ संशोधन अधिनियम भी मस्जिद की सुरक्षा करता है, क्योंकि यह ‘उपयोग के आधार पर वक्फ’ है. 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, इसलिए इस मामले को सुलझाना मंत्री की जिम्मेदारी है. हालांकि, बोर्ड के सीईओ भी इसमें हस्तक्षेप कर सकते थे, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ.”
इससे पहले एक पोस्ट में ओवैसी ने रेस कोर्स के पास स्थित ऐतिहासिक मस्जिद ‘हुजरा कुआं’ को गिराने की कोशिश की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने बताया कि लोगों को इस मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है, जबकि 1977 के गजट में इसका जिक्र है. इसकी देखभाल करने वाले को मस्जिद गिराने की धमकी दी गई है, जबकि इस संबंध में कोई औपचारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया है
‘मुसलमानों की इबादतगाहों को क्यों निशाना…’
असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा, “मुसलमानों की इबादतगाहों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? वक्फ संशोधन अधिनियम और धार्मिक स्थल अधिनियम के दुरुपयोग को लेकर हमारी आशंकाएं सच होती दिख रही हैं. सरकार को इन गैरकानूनी धमकियों को वापस लेना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि मस्जिद के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.”
पिछले करीब 40 साल से मस्जिद से जुड़े मोहम्मद हारून ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बताया कि अधिकारियों ने उनसे छह दिनों के अंदर मस्जिद खाली करने को कहा है. मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है और ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ (एलएनडीओ) ने सभी गेट बंद कर दिए हैं.
‘बीजेपी और RSS की मुस्लिम दुश्मनी…’
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, “मौजूदा सरकार शायद हिंदुस्तान की हर मस्जिद को सरकारी जमीन पर बनी हुई मस्जिद बता सकती है. मंदिर-मस्जिद के अलावा उनके पास कोई दूसरा मुद्दा नहीं है. सरकार में कोई मुसलमान मंत्री नहीं है. बीजेपी और आरएसएस की मुस्लिम दुश्मनी बार-बार सामने आती है.”
‘मुसलमानों की इबादत वाली जगहों…’
कश्मीर के धर्मगुरू मीरवाइज उमर फारूक ने इस फैसले को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “यह बेहद चिंताजनक है कि दिल्ली की ऐतिहासिक ‘रेस कोर्स मस्जिद’ को छह दिन के अंदर खाली करने का नोटिस दिया गया है. उतनी ही चिंता की बात यह भी है कि वक्फ अधिकारी इसका बचाव करने में विफल रहे हैं. क्या मुसलमानों के इबादत वाली जगहों के लिए यही अब नई परिपाटी बनती जा रही है?”
उन्होंने लिखा, “इन्हीं सब वजहों से हमने वक्फ संशोधनों और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार का नियंत्रण बढ़ाने का कड़ा विरोध किया था. अगर कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त एक मस्जिद को भी नहीं बचाया जा सकता, तो फिर बाकी जगहों के लिए क्या सुरक्षा उपाय बचते हैं?”




