मध्य प्रदेश: भोपाल की लाइफलाइन ‘बड़ी झील’ के पास बुलडोजर एक्शन, 347 निर्माण तोड़े जाएंगे

sagar parvez

Madhya Pradesh: Bulldozer Action Near Bhopal’s ‘Badi Jheel’; 347 Structures to be Demolished

Madhya Pradesh: Bulldozer Action Near Bhopal's 'Badi Jheel'; 347 Structures to be Demolished
Madhya Pradesh: Bulldozer Action Near Bhopal’s ‘Badi Jheel’; 347 Structures to be Demolished

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अब तक की सबसे बड़ी बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई है. यहां की लाइफलाइन ‘बड़ी झील’ के पास बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है

Madhya Pradesh: Bulldozer Action Near Bhopal’s ‘Badi Jheel’; 347 Structures to be Demolished

भोपाल की लाइफलाइन कही जाने वाली बड़ी झील शहर की पहचान है लेकिन भीड़ भाड़ और अवैध निर्माण ने यहां घूमने आने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. अब प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है. क्योंकि बड़ा तालाब के किनारे बने अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलना शुरू हो गया है. 6 अप्रैल से शुरू हुआ यह अभियान 21 अप्रैल तक चलेगा. कुल 15 दिनों तक चलने वाली इस कार्रवाई में जिला प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं, जो तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) के 50 मीटर दायरे में आते हैं.

पहले दिन भदभदा में चला ‘पीला पंजा’अभियान के पहले दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर एक्शन देखने को मिला. यहां 9 दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर चला. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके. स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और पीछे नहीं हटेगी.

भोज वेटलैंड रूल्स के बाद सख्ती प्रशासन का कहना है कि 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बड़ा तालाब से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के निर्माण को अवैध माना जाएगा. इसी नियम के तहत सभी निर्माण हटाए जाएंगे. प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई तालाब की पारिस्थितिकी, जलस्तर और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है.

राजा भोज ने कराया था झील का निर्माण

भोपाल की बड़ी झील को भोजताल या अपर लेक भी कहा जाता है. 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा निर्मित भारत की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक है. यह आज भोपाल शहर की पहचान भी है. यह शहर के पीने के पानी का मुख्य स्रोत है और 2002 में इसे ‘रामसर साइट’ का दर्जा मिला. यहां बोट क्लब, खूबसूरत व्यू और वॉटर स्पोर्ट्स पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.

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