उत्तराखंड: महाशिवरात्रि पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब

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Uttarakhand | Massive wave of faith has descended upon Haridwar to celebrate Mahashivratri

Uttarakhand | Massive wave of faith has descended upon Haridwar to celebrate Mahashivratri
Uttarakhand | Massive wave of faith has descended upon Haridwar to celebrate Mahashivratri

हरिद्वार के अलावा देहरादून के प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भारी भीड़ रही। दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

Uttarakhand | Massive wave of faith has descended upon Haridwar to celebrate Mahashivratri

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही प्रमुख शिवालयों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। गंगाजल और पूजन सामग्री के साथ भक्त जलाभिषेक के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे, जबकि मंदिर परिसर “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।

विशेष ज्योतिषीय संयोग के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों से अधिक बताई जा रही है।

दक्षेश्वर महादेव मंदिर: ‘बाबा की ससुराल’ में विशेष श्रद्धा

हरिद्वार स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात है ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

मंदिर के पुजारी महंत रविंद्र पुरी ने देश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि फाल्गुन मास में मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि वर्ष की चार प्रमुख रातों में से एक मानी जाती है। आस्था की दृष्टि से दक्षेश्वर महादेव मंदिर का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे भगवान शिव की ससुराल और माता सती का जन्मस्थान माना जाता है।

उन्होंने बताया कि करीब 300 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जब महाशिवरात्रि पर कुंभ राशि में पांच ग्रह एक साथ स्थित हैं। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर श्रद्धा और समर्पण से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उनके अनुसार, यह पर्व केवल शिव-पार्वती विवाह का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति और चेतना के मिलन का भी दिन है।

देहरादून में भी उमड़ी भीड़, टपकेश्वर धाम में विशेष पूजन

हरिद्वार के अलावा देहरादून के प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भारी भीड़ रही। दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि भारत ऋषियों और देवताओं की तपोभूमि है, और महाशिवरात्रि सनातन परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण रातों में से एक है। सुबह से ही भक्त भगवान शिव पर जल अर्पित कर रहे हैं।

टपकेश्वर महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी बताया गया। मान्यता है कि ऋषि द्रोणाचार्य ने यहां कठोर तप किया था और भगवान शिव ने प्रकट होकर उन्हें पुत्र अश्वथामा का आशीर्वाद दिया था।

प्रयागराज: माघ मेले के अंतिम स्नान पर 21 लाख श्रद्धालु

महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रयागराज में चल रहे माघ मेले का अंतिम स्नान पर्व भी आस्था का बड़ा केंद्र बना। रविवार सुबह 10 बजे तक 21 लाख श्रद्धालु गंगा और संगम में डुबकी लगा चुके थे।

मेला प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, देर रात से ही श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि सभी घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें तैनात हैं। नाविकों और गोताखोरों को भी घाटों पर लगाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम उपलब्ध कराए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जा रही है। अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं।

सुरक्षा और व्यवस्था पर फोकस

महाशिवरात्रि के इस पर्व पर उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। एक ओर मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना जारी रही, तो दूसरी ओर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

विशेष ज्योतिषीय संयोग और धार्मिक मान्यताओं के कारण इस बार महाशिवरात्रि का उत्साह और अधिक दिखाई दिया। देशभर के श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन रहे और पूरे दिन मंदिरों और घाटों पर भक्ति का वातावरण बना रहा।

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