गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी समेत 66 भारतीयों के पास है साइप्रस का गोल्डन पासपोर्ट

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Vinod Adani Among 66 Indians Who Got Cyprus’s ‘Golden Passport’ Between 2014 and 2020

Vinod Adani Among 66 Indians Who Got Cyprus’s ‘Golden Passport’ Between 2014 and 2020
Vinod Adani Among 66 Indians Who Got Cyprus’s ‘Golden Passport’ Between 2014 and 2020

गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी समेत 66 भारतीयों के पास साइप्रस का गोल्डन पासपोर्ट है। साइप्रस को बड़ी पूंजी की हेराफेरी करने वालों की पनाहगाह के तौर माना जाता है। गोल्डन पासपोर्ट हासिल करने के लिए वहां मोटी रकम निवेश करना होती है।

Vinod Adani Among 66 Indians Who Got Cyprus’s ‘Golden Passport’ Between 2014 and 2020

अडानी समूह के मालिक उद्योगपति गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी उन 66 भारतीयों में से हैं जिनके पास साइप्रस का गोल्डन पासपोर्ट है। इस पासपोर्ट को हासिल करने के लिए आपके पास 2 मिलियन यूरो यानी करीब 18 करोड़ रुपए होने चाहिए जो आप साइप्रस में निवेश करें, इसके बाद आपको वहां की नागरिकता मिल जाएगी।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को ऐसे 66 लोगों के नाम प्रकाशित किए हैं जिन्होंने साइप्रस का गोल्डन पासपोर्ट हासिल किया है। इनमें सबसे अहम नाम गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी का है। विनोद अडानी का नाम पनामा पेपर्स और पेंडोरा पेपर्स में भी आया था। द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है साइप्रस फ्लोटिंग ऑफशोर कंपनियों और धनी भारतीयों के लिए एक पसंदीदा जगह है। यह शानदार जिंदगी जीने के अलावा अपने देश में अवैध तरीके से हासिल की गई दौलत के आरोपों से बचने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक सुरक्षित जगह मानी जाती है।

साइप्रस की गोल्डन पासपोर्ट को 2007 में शुरु किया गया था। इसे साइप्रस निवेश प्रोग्राम भी कहा गया था। कहा गया कि इस योजना के तहत आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्तियों ने यहां की नागरिकता हासिल की और देश में निवेश किया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साइप्रस सरकार द्वारा 2022 के ऑडिट से पता चला है कि इस योजना के तहक कुल 7,327 व्यक्तियों को साइप्रस पासपोर्ट के लिए मंजूरी दी गई थी, जिनमें से 3,517 निवेशक” थे और बाकी उनके परिवारों के सदस्य थे।

बाद में इस योजना में कई बदलाव किए गए और आखिर में 2020 में इस योजना को खत्म कर दिया क्योंकि ऐसे आरोप लगने लगे थे कि आपराधिक आरोपों, संदिग्ध चरित्र और राजनीतिक तौर पर जुड़े लोग इस योजना का सर्वाधिक फायदा उठा रहे थे।

इंडियन एक्सप्रेस और अन्य पत्रकारीय संस्थानों द्वारा किए गए इन्वेस्टिगेशन में ओसीसीपीआर (Organized Crime And Corruption Reporting Project) भी शामिल था। इसने ‘गोल्डन पासपोर्ट’ हासिल करने वाले हजारों प्रमुख व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया है। इनसे पता चलता है कि 2020 के बाद 83 मामलों में पासपोर्ट रद्द करने की सिफारिश की गई। आंकड़ों से पता चलता है कि 2014 और 2020 के बीच 66 भारतीय साइप्रस पासपोर्ट प्राप्त करने में कामयाब रहे। इस पूरी प्रक्रिया में औसतन तीन महीने से एक साल तक का समय लगा।

साइप्रस की नागरिकता पाने वाले शुरुआती आवेदकों में गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद शांतिलाल अडानी भी शामिल थे, जिनकी ऑफशोर होल्डिंग्स की जानकारी जनवरी 2023 की हिंडनबर्ग रिपोर्ट में दी गई है। विनोद अडानी (जिन्हें सबसे अमीर एनआरआई में से एक बताया जाता है) 1990 के दशक की शुरुआत से दुबई में रहते हैं लेकिन उनके पास साइप्रस का पासपोर्ट है। ओसीसीआरपी के डेटा में एक ‘निवेशक के रूप में बताया गया है, और सामने आया है कि उन्होंने 3 अगस्त 2016 को ‘गोल्डन पासपोर्ट’ योजना के लिए आवेदन किया था। तीन महीने के अंदर ही उन्हें 25 नवंबर 2016 को साइप्रस की नागरिकता दे दी गई थी।

विनोद अडानी का नाम पहले इंडियन एक्सप्रेस-आईसीआईजे की ऑफशोर इन्वेस्टीगेशन में भी सामने आया था। इससे पहले बहामास में जीए इंटरनेशनल इंक नामक कंपनी की स्थापना के लिए 2016 के पनामा पेपर्स में भी विनोद अडानी का नाम सामने आ चुका है। 2021 के पेंडोरा पेपर्स में विनोद अडानी का नाम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स कंपनी हिबिस्कस आरई होल्डिंग्स लिमिटेड को शामिल करने के लिए आया था।

विनोद अडानी के अलावा जिन प्रमुख भारतीयों के पास साइप्रस की नागरिकता है उनमें प्रमुख भारतीय उद्योगपति पंकज ओसवाल और उनकी पत्नी राधिका ओसवाल हैं। ये बर्रुप होल्डिंग्स लिमिटेड के संस्थापक हैं। ओसवाल परिवार हाल ही में दुनिया के सबसे महंगे घरों में से एक घर को स्विट्जरलैंड में 200 मिलियन डॉलर में खरीदने के लिए सुर्खियों में आया था। जांच से सामने आया है कि पंकज ओसवाल ने अपनी साइप्रस नागरिकता हासिल करने के बाद साइप्रोल लिमिटेड को बंद कर दिया।

जांच में पता चला है कि अक्टूबर 2020 में साइप्रस सरकार ने योजना की खामियों और प्रावधानों का हवाला देते हुए ‘गोल्डन पासपोर्ट’ योजना को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का निर्णय लिया। ओसीसीआरपी और अन्य मीडिया द्वारा साइप्रस गोपनीय जांच के लिए भेजे गए सवालों के जवाब में साइप्रस के गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने 233 व्यक्तियों की नागरिकता खत्म करने का निर्णय लिया है और उनमें से 68 व्यक्ति निवेशक हैं और 165 उनके परिवार के सदस्य हैं।

जिन लोगों के पासपोर्ट निरस्त किए जाने का फैसला हुआ उनमें केवल एक भारतीय है। उनका नाम अनुभव अग्रवाल है। उन्हें ‘गोल्डन पासपोर्ट’ 2 नवंबर, 2016 को आवेदन के सिर्फ चार महीने के भीतर मिल गया था। एक जांच में कहा गया है कि अनुभव अग्रवाल का नाम नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL) घोटाले में आया था और उन्होंने नागरिकता के लिए अपने आवेदन में संदिग्ध कंपनियों के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं किया था। अनुभव अग्रवाल पर आरोप है कि एनएसईएल घोटाले मे उन्होंने निवेशकों के साथ 3,600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की थी। अगस्त 2020 में उन्हें अबू धाबी में गिरफ्तार किया गया और जून 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया।

अनुभव अग्रवाल के अलावा भी कई अहम भारतीय गोल्डन पासपोर्ट करने वालों की सूची में हैं। इंडियन एक्सप्रेस बताता है कि इन लोगों ने भारतीय केंद्रीय एजेंसियों से संबंध बना रखा है, लेकिन अब बंद हो चुकी निवेश योजना के तहत साइप्रस पासपोर्ट प्राप्त करने में कामयाब रहे हैं।

ऐसे ही व्यक्ति हैं नेसामणिमारन मुथु (जिन्हें एमजीएम मारन के नाम से जाना जाता है)। वे तमिलनाडु के एक व्यवसायी और तमिलनाडु मर्केंटाइल बैंक लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष हैं। उन्होंने भी 2016 में साइप्रस की नागरिकता हासिल कर ली थी। उनके आवेदन को केवल दो महीनों में मंजूरी दे दी गई थी। 2017 में उनके दोनों बच्चों को भी नागरिकता मिल गई थी। एमजीएम मारन और उनकी कंपनी एग्रीफ्यूरेन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड भारत में ईडी के निशाने पर हैं। दिसंबर 2022 में उनकी 293 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है क्योंकि मारन ने भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बिना सिंगापुर में दो कंपनियों में एक समान विदेशी निवेश किया था।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश के एक व्यवसायी ने भी साइप्रस की नागरिकता ली है। उनका नाम वीरकरन अवस्थी है। उनकी पत्नी रितिका अवस्थी के पास भी गोल्डन पासपोर्ट है। डेटा से पता चलता है कि रितिका को 20 दिनों में नागरिकता की मंजूरी दे दी गई थी। अवस्थी पर आरोप है कि उन्होंने बुश फूड्स ओवरसीज के नाम की कंपनी में निदेशक के रूप में गेहूं और धान खरीदी के नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी की थी, और मामला खुलने पर लंदन चले गए थे। लेकिन वर्षों बाद पहले उत्तर प्रदेश पुलिस, फिर दिल्ली पुलिस और उसके बाद ईडी ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। अक्टूबर 2019 में उन्हें लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया। नवंबर 2020 में ईडी ने मामले में चार्जशीट दायर की, जिसमें 750 करोड़ रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया और आखिरकार दिसंबर 2021 में यूके की अदालतों द्वारा उनके प्रत्यर्पण की अनुमति दी गई।

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