
उप्र के बदायूं जिले के बिल्सी थाना क्षेत्र के एक गांव में ईंट भट्टे पर “आसमान से बर्फ” का एक बड़ा टुकड़ा गिरा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर बाल बाल बच गए।
UP | A large piece of ice ‘fell from the sky’ in Badaun, workers have a narrow escape
बिल्सी, अमृत विचार। साफ मौसम में अचानक ईट भट्ठा पर आसमान से बर्फ की सिल्ली गिरने से अफरा तफरी मच गई। वहां पर काम करने वाले मजदूर और उनका परिवार बाल बाल बच गया। बर्फ गिरने की सूचना पर वहां पर लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। जानकारी होने पर एसडीएम ने भी जांच के लिए मौके पर पुलिस को भेज दिया। जांच के दौरान पता नहीं चल सका कि साफ मौसम में आश्चर्यचकित करने वाली घटना को पुलिस और तहसील के अधिकारी कुदरत का करिश्मा बता रहे हैं।
नगर के मोहल्ला संख्या आठ स्थित एक ईट भट्ठे पर रविवार सुबह अचानक आसमान से एक बर्फ की सिल्ली आकर जमीन पर गिरी। हादसे के दौरान वहां काम कर रहा मजदूर और उसका परिवार बाल-बाल बच गया। तहसील क्षेत्र के गांव दिधौनी निवासी वीर सिंह ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ सुबह करीब नौ बजे ईंट मिट्टी से कच्ची ईट बनाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाके के साथ बर्फ की एक बड़ी सिल्ली उनके पास आकर गिरी।
सिल्ली गिरते ही आसपास काम कर रही नंदनी, सोमेंद्र, काजल, पूनम और संगीता घबरा गईं। गनीमत रही कि इस हादसा में किसी के चोट नहीं लगी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए। लोगों में यह चर्चा का विषय बना रहा कि बर्फ की सिल्ली आखिर आसमान से कैसे गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बर्फ की सिल्ली इतनी तेज रफ़्तार से नीचे आई कि जमीन पर टकराते ही कई टुकड़ों में बिखर गई और उसके छोटे-छोटे हिस्से दूर-दूर तक जा गिरे।
बर्फ की सिल्ली गिरने की खबर देखते ही देखते पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई। लोग इसे देखने के लिए ईंट भट्ठे पर उमड़ पड़े। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह सिल्ली आसमान से गिरी है। घटना को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। ईट भट्ठा पर बर्फ की सिल्ली गिरने की जानकारी होने पर एसडीएम प्रेमपाल सिंह ने जांच के लिए थाना पुलिस को मौके पर भेज दिया। थाना पुलिस ने बर्फ गिरने की जानकारी लोगों की। लेकिन बर्फ कैसे आई। इस घटना को वह कुदरत का करिश्मा बता रहे हैं।
एसडीएम बिल्सी प्रेमपाल सिंह ईट भट्ठे पर बर्फ की सिल्ली गिरने की जानकारी मिली थी। थाना पुलिस को मौके भेजा था। इसकी पुष्टि नहीं हो सकी कि इतनी ऊंचाई से बर्फ की सिल्ली फेंकी गई या फिर पानी के कड़ बर्फ में तब्दील होकर सिल्ली के रूप में नीचे गिरे हों। नीचे गिरने के बाद बर्फ पानी बन गया। जिसकी वैज्ञानिक जांच भी संभव नहीं है।




