
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों पर एक याचिका पर सुनवाई हो रही। सेन ने बताया कि इन दो मौतों के साथ मध्यप्रदेश में एक जनवरी से अब तक नौ बाघों की मौत हो चुकी है
Two tigers electrocuted in Madhya Pradesh’s Shahdol; nine big cat deaths in state since Jan 1, India
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सोमवार को करंट लगने से एक बाघिन समेत दो बाघों की मौत हो गई। वन विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही राज्य में इस साल अब तक नौ बाघों की मौत हो चुकी है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शुभरंजन सेन ने बताया कि दोनों बाघों के शव उत्तरी शहडोल वन क्षेत्र में 100 मीटर से भी कम दूरी पर कृषि भूमि पर पाए गए। उन्होंने कहा, “करंट लगने से बाघों की मौत हुई। घटना में इस्तेमाल किए गए तार बरामद कर लिए गए हैं।”
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों पर एक याचिका पर सुनवाई हो रही। सेन ने बताया कि इन दो मौतों के साथ मध्यप्रदेश में एक जनवरी से अब तक नौ बाघों की मौत हो चुकी है और इससे पहले राज्य में सात बाघों की मौत हुई थी। वन अधिकारियों के अनुसार, वर्ष की शुरुआत से अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में 21 बाघों की मौत हो चुकी है।
हालांकि, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की वेबसाइट पर मृतक बाघों की संख्या 19 बताई गई है।
वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आखिरी बार 26 जनवरी को मध्यप्रदेश के पेंच बाघ अभयारण्य के बफर जोन में बाघ की मौत की सूचना मिली थी। वन अधिकारियों ने बताया कि बाघ आमतौर पर फसलों को जानवरों से बचाने के लिए किसानों द्वारा बिछाए गए बिजली के बाड़े के संपर्क में आ जाते हैं।
प्रदेश को बाघों के राज्य (टाइगर स्टेट) के रूप में जाना जाता है, क्योंकि देश में सबसे अधिक बाघ यहीं है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में बाघों की मौत के लगातार बढ़ते आंकड़ों पर गंभीरता दिखाते हुए पिछले दिनों केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही ‘नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी’ (एनटीसीए) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
अदालत ने वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया। याचिका में दावा किया गया था कि 2025 में राज्य में 54 बाघों की मौत हुई, जो ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक है। दुबे ने याचिका में बताया था कि इनमें आधे से अधिक बाघों की मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं। दुबे ने बताया कि उच्च न्यायालय 11 फरवरी को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगा।
उन्होंने एनटीसीए और मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शहडोल घटना में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया तथा वन्यजीव प्रशासन में बदलाव की मांग की। दुबे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि मौतें एक प्रणालीगत विफलता को दर्शाती हैं। उन्होंने वरिष्ठ वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।




