उत्तराखंड: मोहब्बत के बाज़ार पर नफ़रत का शिकंजा, मुस्लिम दुकानदार को भीड़ से बचाने वाले मोहम्मद दीपक के खिलाफ केस दर्ज

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Two men Deepak Kumar and Vijay Rawat who opposed harassment of Muslim shopkeeper booked in Uttarakhand

Two men Deepak Kumar and Vijay Rawat who opposed harassment of Muslim shopkeeper booked in Uttarakhand
Two men Deepak Kumar and Vijay Rawat who opposed harassment of Muslim shopkeeper booked in Uttarakhand

कोटद्वार में कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद में जिस मोहम्मद दीपक ने भीड़ से मुस्लिम दुकानदार की जान बचाई, उसी पर अब एफआईआर दर्ज की गई है।

Two men Deepak Kumar and Vijay Rawat who opposed harassment of Muslim shopkeeper booked in Uttarakhand

उत्तराखंड के कोटद्वार में जो इंसान इंसानियत के लिए खड़ा हुआ और हालात जब तनाव की कगार पर थे और किसी अनहोनी की आशंका मंडरा रही थी, तब उसने भीड़ के बीच फंसे एक मुस्लिम दुकानदार को बचाया। अब उसी मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कारकी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

यह मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि उस सवाल का है कि क्या आज के माहौल में इंसानियत के लिए खड़ा होना भी अपराध बन सकता है।

दुकान के नाम से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद पौड़ी जिले के कोटद्वार स्थित पटेल मार्ग पर एक कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ। दुकान के बोर्ड पर बाबा लिखा था, हालांकि उसके ठीक नीचे मुस्लिम दुकानदार ने अपना नाम भी लिखा था। बावजूद इसके बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दुकान के नाम पर आपत्ति जताई और दुकान के बोर्ड से बाबा शब्द हटाने की मांग की और बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार से बदतमीजी करने लगे।

विवाद देख मोहम्मद दीपक मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश। जब वे नहीं माने तो नोंकझोंक शुरू हो गई। मोहम्मद दीपक के विरोध के बाद आखिरकर बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां से भाग खड़े हुए।

दूसरे जिलों से पहुंचे कार्यकर्ता, कोटद्वार में प्रदर्शन

घटना के अगले ही दिन बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे। इनमें कई कार्यकर्ता दूसरे जिलों से भी आए थे। पहले शहर में जुलूस निकाला गया और बाद में सभी मालवीय उद्यान में एकत्र होकर प्रदर्शन करने लगे।

जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, वैसे-वैसे शहर का माहौल भी तनावपूर्ण होता चला गया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह मोहम्मद दीपक को गालियां देते नजर आए। मौके पर पुलिस भी मौजूद थी। पुलिस के सामने बजरंग दल के कार्यकर्ता दीपक गालियां दे रहे थे।

जिम के बाहर पहुंची भीड़

प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय और गंभीर हो गए, जब कुछ प्रदर्शनकारी संबंधित युवक के जिम के बाहर पहुंच गए। वहां मौजूद लोगों में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया।

दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज

कपड़ों की दुकान के मालिक वकील अहमद की तहरीर पर दो नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ दुकान का नाम बदलने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।

इसके अलावा, कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी अलग से मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और बयानबाजी को लेकर भी सख्त चेतावनी जारी की है।

जिसने बचाई जान, उसी पर दर्ज हुआ केस

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम और चौंकाने वाला पहलू मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कारकी का नाम एफआईआर में आना है।

बताया जा रहा है कि जब हालात बिगड़ रहे थे, तब दीपक ने मौके पर मौजूद एक मुस्लिम दुकानदार को भीड़ के बीच से सुरक्षित निकालने की कोशिश की थी, ताकि किसी तरह की हिंसा न हो।

हालांकि, बजरंग दल की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने दीपक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 191(1), 351(2) और 352 लगाई गई हैं। पुलिस के मुताबिक, यह सभी धाराएं फिलहाल जमानती हैं।

SSP पौड़ी बोले- संवाद से हल की कोशिश

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एसएसपी पौड़ी सर्वेश पवार ने कहा कि जिन धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए हैं, उनमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है।

उन्होंने कहा कि पुलिस का मकसद किसी एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि हालात को नियंत्रित करना और शांति व्यवस्था बनाए रखना है।

एसएसपी के अनुसार, दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद को शांत कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि समाज में किसी भी तरह का वैमनस्य न फैले।

कोटद्वार की घटना और बड़ा सवाल

कोटद्वार में हुआ यह घटनाक्रम अब सिर्फ दुकान के नाम या प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। यह उस सामाजिक स्थिति को दर्शाता है, जहां तनाव के माहौल में इंसानियत और कानून के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आती है।

जिस व्यक्ति ने हालात बिगड़ने से पहले एक जान बचाने की कोशिश की, वही अब कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और शहर में शांति बनाए रखने के लिए सतर्कता बरत रही है, लेकिन यह मामला समाज के सामने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ गया है।

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