अरुणाचल CM पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट का झटका, परिवार से जुड़े ठेकों की सीबीआई जांच के आदेश

sagar parvez

Supreme Court Orders CBI Preliminary Inquiry Into Allotment Of Contracts To Arunachal CM Pema Khandu’s Kin

Supreme Court Orders CBI Preliminary Inquiry Into Allotment Of Contracts To Arunachal CM Pema Khandu's Kin
Supreme Court Orders CBI Preliminary Inquiry Into Allotment Of Contracts To Arunachal CM Pema Khandu’s Kin

यह मामला दो गैर-सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि करीब 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके ऐसे लोगों को दिए गए, जो मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े हैं।

Supreme Court Orders CBI Preliminary Inquiry Into Allotment Of Contracts To Arunachal CM Pema Khandu’s Kin

अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांंडू परिवार से जुड़े लोगों को ठेके दिए जाने के आरोपों के कारण मुश्किल में घिर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आज सीबीआई को अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। यह मामला खासतौर पर उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े लोगों को ठेके दिए जाने की बात कही गई है।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया ने दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि सीबीआई दो हफ्तों के अंदर प्रारंभिक जांच दर्ज करे और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सरकारी ठेकों, वर्क ऑर्डर और उनके क्रियान्वयन तक रहेगा। हालांकि, अगर जरूरत पड़ी तो सीबीआई इस समय सीमा के बाहर के लेन-देन को भी देख सकती है, खासकर यह समझने के लिए कि असली लाभार्थी कौन हैं, किन-किन लोगों के बीच संबंध हैं और पैसे का प्रवाह कैसे हुआ।

यह मामला दो गैर-सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि करीब 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके ऐसे लोगों को दिए गए, जो मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कई ठेके नियमों को दरकिनार करके दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में खुले टेंडर की प्रक्रिया को अपनाया ही नहीं गया, जो कि पारदर्शिता के खिलाफ है।

कोर्ट ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया है कि वह टेंडर प्रक्रिया, मंजूरी देने के तरीके, ओपन टेंडर से छूट देने के कारण और कानूनी नियमों के पालन की पूरी जांच करे। साथ ही भुगतान, वर्क ऑर्डर और प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से जुड़े सभी दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सीबीआई को 16 हफ्तों के भीतर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि क्या इस मामले में पूरी तरह से स्वतंत्र और विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं।

राज्य सरकार को भी इस जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि एक हफ्ते के भीतर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो सीबीआई के साथ समन्वय करेगा। साथ ही सभी जरूरी दस्तावेज जैसे टेंडर पेपर, मंजूरी से जुड़े रिकॉर्ड, एग्रीमेंट, बिल और ई-प्रोक्योरमेंट डेटा चार हफ्तों के भीतर सीबीआई को सौंपने होंगे। सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़े किसी भी तरह के दस्तावेज, चाहे वे कागजी हों या डिजिटल, उन्हें न तो नष्ट किया जाए और न ही उनमें कोई बदलाव किया जाए।समाचार पत्र होम डिलीवरी

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके ये निर्देश केवल यह तय करने के लिए हैं कि स्वतंत्र जांच की जरूरत है या नहीं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने किसी भी आरोप को सही या गलत ठहरा दिया है और न ही यह भविष्य की कार्यवाही में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करेगा। इससे पहले पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को सभी ठेकों पर विस्तृत हलफनामा देने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से रिपोर्ट भी मांगी थी। बाद में दिसंबर 2025 में जांच का दायरा बढ़ाकर पूरे राज्य तक कर दिया गया, यह मानते हुए कि मामला सिर्फ तवांग तक सीमित नहीं है।

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