
देशभर में मजदूर और किसान संगठनों ने विभिन्न मांगों को लेकर भारत बंद का आह्वान किया है। नए श्रम नियमों, कृषि और बिजली से जुड़े प्रस्तावों तथा मनरेगा को लेकर नाराजगी जताई जा रही है।
Mega all-India strike to disrupt health, electricity, banking, transport and essential services; 30 crore workers participate
देशभर में आज गुरुवार को विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद की तैयारियां कई राज्यों में पहले से चल रही थीं। अलग-अलग इलाकों में इसका असर भिन्न हो सकता है कुछ जगहों पर बाजार आंशिक रूप से बंद रह सकते हैं, जबकि कहीं-कहीं सरकारी दफ्तरों और सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि हर राज्य में स्थिति एक जैसी नहीं है और स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) ने दावा किया है कि इस हड़ताल में लगभग 30 करोड़ श्रमिकों के हड़ताल में शामिल होने की संभावना है, जो पिछले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में भागीदारी से कहीं अधिक है।
बंद में कई बड़े श्रमिक संगठन शामिल
इस आंदोलन में कई बड़े श्रमिक संगठन शामिल हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों और किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इसी के चलते उन्होंने देशव्यापी बंद का रास्ता अपनाया है। कुछ किसान संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है, जिससे आंदोलन का दायरा और व्यापक हो गया है।
क्या सत्ता सुनेगी उनकी आवाज़-राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा,
“आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा। और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है। जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया। क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ।”
नए श्रम नियमों पर नाराजगी
बंद की मुख्य वजह नए श्रम नियमों को बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि नई श्रम संहिताओं से नौकरी की सुरक्षा कमजोर हो सकती है और कंपनियों को अधिक अधिकार मिल सकते हैं। उनका मानना है कि पहले के प्रावधान कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा करते थे। वे इन नियमों की पुनर्समीक्षा और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा बिजली क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों, कृषि संबंधी मसौदों और ग्रामीण रोजगार योजनाओं को लेकर भी असंतोष जताया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर या सीमित करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। साथ ही, सरकारी संस्थानों के निजीकरण को सीमित रखने की भी मांग उठाई जा रही है, ताकि आम लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।
बैंक के कामकाज पर भी पड़ेगा असर
बंद के समर्थन में कुछ बैंक कर्मचारी संगठनों के शामिल होने से सरकारी बैंकों की शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है। नकद जमा-निकासी और चेक क्लियरेंस जैसे कार्यों में देरी संभव है, हालांकि ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
कुछ शहरों में बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर देखने को मिल सकता है। आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले स्थानीय हालात और यातायात की स्थिति की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।



