भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाले ग्लोबल हंगर इंडेक्स की वेबसाइट ने जानकारी दी कि चीन, तुर्की और कुवैत सहित 17 देशों ने 5 से कम जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है।
India’s rank on the Global Hunger Index (GHI) slipped behind Nepal, Pakistan, Sri Lanka and Bangladesh, Afghanistan
वैश्विक भुखमरी सूचकांक में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका से भी भारत पिछड़ गया है। 121 देशों की सूची में 107वें पायदान पर भारत आ गया है। इसके साथ ही भारत का जीएचआई स्कोर भी गिर गया है – 2000 में यह 38.8 था जो 2014 और 2022 के बीच 28.2 – 29.1 के बीच पहुंच गया है।
भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाले ग्लोबल हंगर इंडेक्स की वेबसाइट ने जानकारी दी कि चीन, तुर्की और कुवैत सहित 17 देशों ने 5 से कम जीएचआई स्कोर के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह रिपोर्ट आयरलैंड की कन्सर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी की संस्था वेल्ट हंगर हिल्फे जारी करती है। शनिवार को यह रिपोर्ट जारी की गई। पिछले साल भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर रखा गया था।
रिपोर्ट पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 8 साल में 2014 के बाद से हमारा स्कोर खराब हुआ है। उन्होंने पूछा, “माननीय प्रधान मंत्री कब बच्चों के बीच कुपोषण, भूख और लाचारगी जैसे वास्तविक मुद्दों का समाधान करेंगे?”
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया गरीबी को खत्म करने को लेकर बहुत पीछे चल रही है। विश्व बैंक की नई रिपोर्ट में पता चला है कि साल 2020 में महामारी की वजह से दुनिया भर में 71 मिलियन लोगों को अत्यधिक गरीबी ओर धकेल दिया गया और इनमें से लगभग 79 फीसदी लोग भारत से थे।
केंद्र सरकार खुद यह बता चुकी है उसने कोविड महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को अनाज बांटा। इसका मतलब तो यह भी निकाला जा सकता है कि यह वही लोग थे जो कोविड महामारी के दौरान गीरीब के उस स्तर पर पहुंच गए थे कि वह दो जून की रोटी का भी इंताजम नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में सरकार को अनाज बांटना पड़ा था, ताकि यह गरीब लोग भूखे न मरे। कोविड के दौरान देश में करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए थे। देश में बेरोजगारी चरम पर है। ऐसे में जो आकंड़े सामने आए हैं वह हकीकत की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है।


