
राजस्थान के चुरू में आज बुधवार को वायुसेना का एक जगुआर प्लेन क्रैश हो गया है. यह हादसा रतनगढ़ के भाणुदा बीदावतान गांव में हुआ. मलबे से 2 शव बरामद हुए हैं. माना जा रहा है कि ये शव पायलट के हैं. वायुसेना की टीम भी घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है.
IAF Jaguar Fighter Jet Crashes in Rajasthan’s Churu, Pilot Killed; Probe Underway
राजस्थान के चूरू जिले में मंगलवार सुबह एक जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी. बाद में पुष्टि हुई कि ये भारतीय वायुसेना का एक जगुआर फाइटर जेट था, जो तकनीकी खराबी के चलते क्रैश हो गया. फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस फाटर जेट में कितने पायलट थे. इस हादसे ने फिर से एक सवाल खड़ा कर दिया—क्या अब जगुआर की सेवा से विदाई का वक्त आ गया है? और सबसे अहम, आखिर ये फाइटर जेट है कितना घातक? आइए इस खबर में जानते हैं ये सारी बातें.
जगुआर एक ऐसा फाइटर जेट है जो जमीन पर हमला करने के लिए बनाया गया है. इसे बहुद्देशीय यानी कई कामों में इस्तेमाल होने वाला विमान भी कहा जाता है. इसका काम दुश्मन की जमीन पर बम गिराना, टारगेट पर सर्जिकल स्ट्राइक करना और युद्ध के मैदान में सैनिकों को एयर सपोर्ट देना होता है. इसे मूल रूप से फ्रांस और ब्रिटेन की संयुक्त साझेदारी से तैयार किया गया था. भारत ने इस घातक जेट को 1979 में अपनी वायुसेना के बेड़े में शामिल किया.
क्यों कहा जाता है भारत का इसे शमशेर?
इसे भारत में ‘शमशेर’ नाम दिया गया, जो इसकी आक्रामकता और शक्ति का प्रतीक है. इसका इस्तेमाल खासतौर पर दुश्मन के जमीनी ठिकानों को निशाना बनाने, बमबारी करने और सामरिक गहराई तक प्रवेश कर सटीक हमलों के लिए किया जाता है. इंडियन एयरफोर्स में इसे ऐसे जेट के रूप में देखा जाता रहा है जो बेहद कठिन परिस्थितियों में भी शानदार प्रदर्शन करता है.
हवा में रफ्तार, जमीन पर तबाही
जगुआर की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्पीड और लो-एल्टीट्यूड अटैक क्षमता है. यह फाइटर जेट करीब 1975 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है, यानी आवाज की रफ्तार से भी तेज. इसके पंखों में इतनी क्षमता है कि यह हजारों किलो वजन के बम और मिसाइलों को लेकर उड़ सकता है. लेकिन उसकी असली खूबी है बेहद कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन के रडार से बचते हुए सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई को अंजाम देना. यही कारण है कि जगुआर को ‘Silent Killer’ भी कहा जाता है.
कारगिल में दिखाई थी असली ताकत
भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध में जब भारतीय सेना ने पहाड़ियों पर घुसे आतंकियों और पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया. तब वायुसेना का मिशन ‘सफेद सागर’ एक अहम भूमिका में सामने आया. इसी मिशन में जगुआर फाइटर जेट्स ने कारगिल की ऊंची और दुर्गम पहाड़ियों में मौजूद दुश्मन के बंकरों को निशाना बनाया. लेजर गाइडेड बमों से लैस इन विमानों ने उस युद्ध में पाकिस्तानी ठिकानों को न केवल तबाह किया बल्कि उनकी रणनीति को भी तहस-नहस कर दिया. ये वही पल थे जब जगुआर ने अपने युद्ध कौशल से साबित किया कि क्यों उसे भारतीय वायुसेना में विशेष स्थान मिला है.
तकनीकी रूप से आधुनिक और भरोसेमंद
भले ही जगुआर को 40 साल पहले भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. लेकिन इसे समय-समय पर अपग्रेड किया गया है. ‘DARIN-III’ जैसे आधुनिक नेविगेशन और अटैक सिस्टम, नाइट विजन और एडवांस्ड रडार तकनीक के साथ यह आज भी दुश्मन के लिए एक बड़ा खतरा है. यह जेट अब भी बॉर्डर से सटे इलाकों में गश्त और रणनीतिक ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाता है. इसकी टेक्नोलॉजी भले ही आज के एडवांस फाइटर जेट्स के बराबर न हो लेकिन यह अभी भी अपनी भूमिका को सफलतापूर्वक निभा रहा है.
सेवा में समर्पित, हादसे दुर्भाग्यपूर्ण
हवा में उड़ते किसी भी विमान के लिए जोखिम हमेशा बना रहता है और जगुआर जैसे पुराने लेकिन अभी भी सक्रिय फाइटर जेट के लिए यह और भी बड़ी चुनौती है. लेकिन इस तरह की घटनाएं इसके योगदान को कम नहीं कर सकतीं. हर बार जब जगुआर को देखा जाता है तो उसकी ताकत, विश्वसनीयता और उसका अद्भुत युद्ध इतिहास नजर आता है. यह वही विमान है जिसने भारत के कई ऑपरेशनों में चुपचाप सफलता दिलाई और खुद की मौजूदगी को गुप्त रखते हुए दुश्मन को चौंकाया.
भविष्य की ओर बढ़ते कदम
भारतीय वायुसेना अब धीरे-धीरे आधुनिक फाइटर जेट्स की ओर बढ़ रही है. राफेल, तेजस, और आने वाले AMCA जैसे विमान आने वाले वर्षों में जगुआर जैसे विमानों की जगह लेंगे. लेकिन जब भी भारतीय वायुसेना की गौरवशाली परंपरा की बात होगी तो जगुआर का नाम गर्व से लिया जाएगा. यह सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं बल्कि भारत की रक्षा ताकत का एक सुनहरा अध्याय है. इसने आसमान में शौर्य की नई परिभाषा गढ़ी.




