
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदू समुदाय ने 3 मार्च 2026 को रंगों के त्योहार होली (डोल जात्रा) को पारंपरिक उत्साह, संगीत और जीवंत रंगों के साथ मनाया
#WATCH_VIDEO | Dhaka, Bangladesh: The Hindu community is celebrating Holi with vibrant displays of colour
रंगों का त्योहार होली हर साल फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है.साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक है. भारत में तो होली बड़े उत्साह से मनाई ही जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी यह त्योहार पूरे जोश के साथ मनाया जाता है. वहां होली को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे डोल पूर्णिमा, डोल यात्रा या बसंत उत्सव. तो आइए जानते हैं कि बांग्लादेश में होली कैसे मनाई जाती है और वहां इस त्योहार से जुड़े क्या नियम हैं. बांग्लादेश में होली का क्या महत्व है?
बांग्लादेश एक मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन वहां हिंदू समुदाय भी बड़ी संख्या में रहता है. यहां के संविधान में धर्मनिरपेक्षता को महत्व दिया गया है, इसलिए अलग-अलग धर्मों के त्योहारों को सांस्कृतिक विविधता के रूप में देखा जाता है. इसी कारण होली का त्योहार भी यहां खुले मन से मनाया जाता है.बांग्लादेश में होली को खास तौर पर डोल पूर्णिमा या डोल यात्रा कहा जाता है. यह दिन भगवान राधा-कृष्ण की पूजा और रंगों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. कई जगहों पर इसे बसंत उत्सव भी कहा जाता है, क्योंकि यह वसंत ऋतु के स्वागत का प्रतीक है.
ढाका में होली का खास उत्साह
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में होली का उत्साह देखने लायक होता है. खासकर ढाका विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राएं रंगों के साथ इस त्योहार को मनाते हैं. यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीत-संगीत और नृत्य का आयोजन किया जाता है. ढाका में स्थित इस्कॉन ढाका और ढाकेश्वरी नेशनल टेंपल में विशेष पूजा-कीर्तन होते हैं. भक्त राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को झूले पर विराजमान करते हैं, भजन गाते हैं और गुलाल अर्पित करते हैं. यहां होलिका दहन भी विधि-विधान से किया जाता है.
बांग्लादेश में होली कैसे खेली जाती है?
बांग्लादेश में होली मनाने का तरीका काफी हद तक भारत जैसा ही है, लेकिन यहां कुछ बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है. यहां सुबह मंदिरों में पूजा-पाठ और कीर्तन होते हैं, फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त देखकर होलिका दहन किया जाता है. इसके बाद अगले दिन लोग अबीर-गुलाल और सूखे रंगों से होली खेलते हैं. सार्वजनिक स्थानों पर शालीनता और कानून का पालन करना जरूरी होता है. कई जगह नृत्य, संगीत और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
रंगों के त्योहार को लेकर यहां क्या नियम
बांग्लादेश में रंगों का त्योहार होली मनाने के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन किया जाता है. यह जरूरी सार्वजनिक छुट्टी नहीं बल्कि वैकल्पिक छुट्टी होती है, मंदिरों और बड़े आयोजनों के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है, खासकर ढाका जैसे शहरों में, सार्वजनिक स्थानों पर शालीनता बनाए रखना जरूरी है. किसी पर जबरदस्ती रंग डालना, हुड़दंग करना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना गलत माना जाता है. राजधानी ढाका सहित अन्य शहरों में पुलिस और प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था करते हैं, खासकर विश्वविद्यालय परिसर और मंदिरों के आसपास




