NIA के DSP तंजील अहमद और उनकी पत्नी हत्याकांड: फांसी की सजा पाए आरोपी रेयान हाई कोर्ट से से बरी

sagar parvez

Allahabad High Court acquits man on death row for 2016 murder of NIA officer, wife

Allahabad High Court acquits man on death row for 2016 murder of NIA officer, wife
Allahabad High Court acquits man on death row for 2016 murder of NIA officer, wife

NIA के DSP तंजील अहमद और उनकी पत्नी के हत्याकांड में बड़ा फैसला, हाईकोर्ट ने रद्द की आरोपी की फांसी की सजा

Allahabad High Court acquits man on death row for 2016 murder of NIA officer, wife

उत्तर प्रदेश के बिजनौर के स्योहारा में डीएसपी तंजील अहदम और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के केस में आरोपी रेयान को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेयान के परिजनों की अपील पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

दरअसल, डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या के मामले में रेयान को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के 2022 के फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को गंभीर त्रुटि माना। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेह से भरा हुआ है। डीएसपी और पत्नी की हत्या के मामले में रेयान और मुनीर को फांसी की सजा सुनाई गई थी। दूसरे आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है।

क्या है वो घटना?

बिजनौर के स्योहारा इलाके में 2 अप्रैल 2016 की रात एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना तब घटी, जब दोनों एक शादी समारोह सेलौट रहे थे। इसी दौरान बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमलावरों ने डीएसपी तंजील अहमद पर 24 गोलियां दागीं। घटना के बाद तंजील अहमद को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

तंजील अहमद की मौत पहले ही हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल फरजाना ने अगले दिन अस्पताल में दम तोड़ दिया। तंजील अहमद के पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर कुल 33 घाव पाए गए थे। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। तंजील अहमद के भाई मोहम्मद रागिब ने स्योहारा थाने में केस दर्ज कराया।
छह साल बाद आया फैसला

पुलिस ने जांच के बाद निचली अदालत में चार्जशीट दायर की। इसमें सहसपुर के निवासी मुनीर और रेयान को डीएसपी और उनकी पत्नी पर फायरिंग का दोषी बताया गया। इसके अलावा चार्जशीट में तंजीम, जैनी और रिजवान का नाम भी शामिल था। निचली अदालत में चली सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने मुनीर और रेयान को हत्याकांड में फांसी की सजा सुना दी। मामले के अन्य आरोपियों तंजीम, जैनी और रिजवान को बरी कर दिया गया था। फैसले के खिलाफ मुनीर और रेयान के परिजन हाई कोर्ट पहुंचे।

हाई कोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान ही 19 नवंबर 2022 को वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में मुनीर की इन्फेक्शन से मौत हो गई। इस कारण मुनीर की अपील हाई कोर्ट में समाप्त हो गई। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
हाई कोर्ट ने माना तर्क

हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार कर दिया। कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान अस्पष्ट और संदिग्ध हैं। इससे अभियोजन का पूरा मामला कमजोरपड़ता है। हाई कोर्ट की पीठ ने अपने 31 मार्च 2026 के फैसले में कहा कि निचली अदालत ने फांसी की सजा देने में गंभीर त्रुटि की है। इसी आधार पर रेयान को सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न ह

रेयान के पिता सादात हुसैन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को संतोषजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि हमारे बेटे के साथ इंसाफ हुआ है। सादात हुसैन ने हाई कोर्ट के फैसले को धैर्य और विश्वास की जीत बताया।

Follow Us on… Dailyhunt kootwitter fb GOOGLE NEWS+

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बंगाल SIR का जिलावार डेटा जारी, मतदाता सूची से 90 लाख से मतदाताओं के नाम हटे

Bengal voter list row deepens as deletions cross 90 lakh mark
Bengal voter list row deepens as deletions cross 90 lakh mark

You May Like

error: Content is protected !!