
पंजाब में बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर सुबह 7 बजे से बंद जारी है। दोपहर 2 बजे तक बाजार, हाईवे, बस और औद्योगिक कामकाज प्रभावित हो सकते हैं।
Punjab bandh: 7,500 schools closed, highways blocked as protest Widespread impact, India
पंजाब: बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर पंजाब में सुबह 7 बजे से बंद जारी है। यह बंद दोपहर 2 बजे तक रहेगा। किसान और सिख संगठनों के समर्थन के चलते राज्य में बाजारों, हाईवे और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ने की संभावना है। किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम), भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) समेत कई संगठनों ने बंद का समर्थन किया है।
मोर्चे का कहना है कि कई बंदी सिंह अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेलों से रिहा नहीं किया गया है। मोर्चा इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से उनकी रिहाई की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर आज सुबह 7 बजे से पंजाब बंद रखा गया है।
हाईवे और परिवहन पर असर, जरूरी सेवाओं को छूट
मोर्चे के कन्वीनर गुरदीप सिंह बठिंडा ने कहा है कि बंद के दौरान हाईवे पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों से अपील की गई है कि दोपहर 2 बजे तक बसों और ट्रकों को सड़कों से दूर रखा जाए। हालांकि एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं को आवाजाही की अनुमति रहेगी। शादी या अंतिम संस्कार में जाने वाले लोगों को भी आने-जाने की छूट दी गई है।
मोर्चे ने व्यापारियों और दुकानदारों से स्वेच्छा से बाजार बंद रखने की अपील की है। इसके लिए पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल से भी बातचीत की जा रही है। किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने भी दुकानदारों और संस्थानों से बंद के सात घंटे के दौरान समर्थन करने की अपील की है।
स्कूल-कॉलेज और औद्योगिक कामकाज पर भी असर
बंद के मद्देनजर मोर्चे ने स्कूलों और कॉलेजों को भी बंद रखने की अपील की है। कई निजी स्कूल शुक्रवार को कैंपस बंद रखने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि सरकारी स्कूलों को बंद रखने के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं हुआ है। दूध विक्रेताओं से कहा गया था कि वे सुबह 7 बजे से पहले या फिर शाम को दूध बांटें।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी बंद का असर पड़ने की आशंका है। मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि सुबह 7 बजे से पहले शुरू होने वाली फैक्टरी शिफ्ट में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी। वहीं, सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्रमिकों को सड़कों पर आवाजाही की अनुमति नहीं देने की चेतावनी दी गई है। इससे इस अवधि में औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है।



