उत्तराखंडः बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री में सिख, ईसाई, बौध, मुसलमान के प्रवेश पर लगेगी रोक, मंदिर समिति का फरमान

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Non-Hindus to be banned from entering Gangotri Dham, Haridwar ghats in Uttarakhand: Temple committee

Non-Hindus to be banned from entering Gangotri Dham, Haridwar ghats in Uttarakhand: Temple committee
Non-Hindus to be banned from entering Gangotri Dham, Haridwar ghats in Uttarakhand: Temple committee

कांग्रेस ने इस पर कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के काम कर रही है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार को सोच लेना चाहिए कि कहां-कहां प्रतिबंध लगाना है और एक बार में ही वह प्रतिबंध लगा दे।

Non-Hindus to be banned from entering Gangotri Dham, Haridwar ghats in Uttarakhand: Temple committee

उत्तराखंड में बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा। हालांकि, चार धामों में से एक यमुनोत्री मंदिर समिति ने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने इस विषय पर आम सहमति बना ली है और जल्द ही इस पर बोर्ड की बैठक में निर्णय ले लिया जाएगा जबकि गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय ले लिया है।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर क्षेत्रों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने के मामले पर साधु-संतों, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय निवासियों समेत सभी हितधारकों के साथ सहमति बना ली गयी है। उन्होंने कहा, “इस सप्ताह के आखिर में होने वाली मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगा दी जाएगी जिसके बाद यह नियम बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों में लागू हो जाएगा।”

हेमंत द्विवेदी ने कहा, “गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की व्यवस्था आदि शंकराचार्य के समय से ही है और हमारा संविधान भी हमें अपने धार्मिक स्थानों के प्रबंधन का अधिकार देता है।” उन्होंने कहा, “बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम कोई पर्यटक स्थल नहीं बल्कि आस्था के केंद्र हैं। ये वे वैदिक केंद्र हैं जिनकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 प्रत्येक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों का इन मंदिरों में स्वागत है।

लंबे समय से केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में आते रहे सिख और जैन श्रद्धालुओं के बारे में पूछे जाने पर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने कहा कि यह मुद्दा किसी धर्म विशेष का नहीं बल्कि उस धार्मिक स्थान में उस व्यक्ति की आस्था का है। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) भी दोनों मंदिरों के दर्शन के लिए जाते रहे हैं।

उधर, गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि किसी भी गैर हिंदू को मां गंगा के मंदिर में आने से रोका जाएगा। सेमवाल ने कहा, “हम पहले ही इस बात को बार-बार कहते रहे हैं और अब फिर मंदिर समिति की ओर से घोषणा करते हैं कि किसी भी गैर-हिंदू को मां भगवती गंगा के मंदिर में आने से रोका जाएगा। गंगोत्री धाम गैर हिंदुओ के लिए पूर्णत: वर्जित होगा।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस संबंध में कहा कि चार धाम यात्रा के प्रबंधन में मुख्य भूमिका मंदिर समितियों की है जबकि सरकार की भूमिका केवल सहयोगी की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी हितधारकों की बात सुनी जाएगी।

गौरतलब है कि हाल में हरिद्वार में हर की पौड़ी और आसपास के घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी अगले साल प्रस्तावित अर्धकुंभ से पहले कुंभ क्षेत्र में आने वाले सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थानों पर गैर हिंदू प्रवेश को वर्जित किए जाने की मांग की है। गंगा सभा ने हरिद्वार नगर पालिका अधिनियम 1916 का हवाला देते हुए हर की पौड़ी के आसपास के क्षेत्र में ‘अहिंदू निषेध क्षेत्र’ के बोर्ड भी लगा दिए हैं।

कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की बीजेपी सरकार जनसमस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के काम कर रही है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “सरकार को सोच लेना चाहिए कि कहां-कहां प्रतिबंध लगाना है और एक बार में ही वह प्रतिबंध लगा दे। बार-बार ऐसा करके वह लोगों को उलझाकर जन समस्याओं से ध्यान हटाना चाहती है।”

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