मुंबई की मतदाता सूची में बड़ा खुलासा, 11 % डुप्लीकेट ‘ मतदाता, एक जगह 103 एंट्री

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Mumbai voter list reveals 11% ‘duplicate’ voter, 103 entries in one place

Mumbai voter list reveals 11% 'duplicate' voter, 103 entries in one place
Mumbai voter list reveals 11% ‘duplicate’ voter, 103 entries in one place

मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने लोगों को सुधार और आपत्ति दर्ज करने का अतिरिक्त अवसर दिया है। पहले यह अंतिम तारीख 27 नवंबर तय की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3 दिसंबर कर दिया गया है।

Mumbai voter list reveals 11% ‘duplicate’ voter, 103 entries in one place

मुंबई में आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच मतदाता सूची को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। शहर के कुल 1.03 करोड़ मतदाताओं में से 10.64 फीसदी यानी 11 लाख से ज्यादा लोगों के नाम सूची में दो या उससे अधिक बार दर्ज पाए गए हैं। यह खुलासा महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों में हुआ है।

डुप्लीकेट नामों की संख्या 11 लाख पार

मसौदा मतदाता सूची का निरीक्षण करते हुए आयोग ने पाया कि 4.33 लाख मतदाताओं के नाम दो से लेकर 103 बार तक दोहराए गए हैं। इन्हें जोड़ने पर कुल ‘डुप्लीकेट प्रविष्टियों’ की संख्या 11,01,505 तक पहुंच गई, जो किसी भी बड़े महानगर की वोटर लिस्ट के लिहाज से एक गंभीर विसंगति मानी जा रही है।

यह पहला मौका है जब मतदाता सूची में दोहराव का स्तर इतना बड़ा सामने आया है। कई विशेषज्ञ इसे डेटा इंटीग्रेशन और पुराने रिकॉर्ड अपडेट न होने की समस्या से जोड़ रहे हैं।

आपत्ति दर्ज करने की समय सीमा बढ़ी

मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने लोगों को सुधार और आपत्ति दर्ज करने का अतिरिक्त अवसर दिया है। पहले यह अंतिम तारीख 27 नवंबर तय की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3 दिसंबर कर दिया गया है।

आयोग का कहना है कि बड़ी संख्या में मिली डुप्लीकेट प्रविष्टियों के चलते नागरिकों को त्रुटि सुधार के लिए अधिक समय देना जरूरी था।

अंतिम सूची 10 दिसंबर को जारी होगी

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के बयान के अनुसार:

सुधारों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 10 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी।

अंतिम सूची जारी होने के बाद नगर निकाय और अन्य चुनावों की तैयारियां तेज होने की उम्मीद है।

क्यों बढ़ रही हैं दोहरी प्रविष्टियां?

स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे कई वजहें सामने आ सकती हैं-

  • मतदान क्षेत्र बदलने पर पुराने रिकॉर्ड समय पर हटना।
  • नाम या पते की स्पेलिंग में अंतर।
  • अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर पुनः पंजीकरण।
  • शहर में बड़े पैमाने पर आवागमन और किरायेदारी का बढ़ना।

हालांकि, आयोग का कहना है कि गलती सुधारने के लिए आवश्यक तकनीकी कदम लगातार लिए जा रहे हैं।

मतदाताओं से अपील, अपना नाम तुरंत जांचें

चुनाव आयोग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे मतदाता सूची में अपना नाम, मौजूदा पता और अन्य विवरण अवश्य जांच लें।

डुप्लीकेट प्रविष्टियां न सिर्फ प्रशासन के लिए मुश्किल पैदा करती हैं, बल्कि कई बार मतदान के दिन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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